
श्री लोकेश कुमार जैन, व्याख्याता
राउमावि चंदोड़ा, (सेमारी) उदयपुर
मानवता का पर्याय है योग
योग दिवस महज अन्य दिवसों की तरह एक साधारण दिवस नही है अपितु यह सच्चे अर्थों में मानवता के उत्कर्ष का उत्कृष्ट साधन है। इस वर्ष योग दिवस की थीम योग फ़ॉर ह्यूमैनिटी’ रखी गई है। योग का मानवता से गहरा नाता है। कोरोना काल के समय भी मानवता का सबसे ज्यादा किसी ने साथ दिया तो वह योग ही है जिसने मनुष्य को संकट की इस घड़ी में तन, मन, धर्म व संस्कृति से जोड़े रखा। जब संसार की सभी चिकित्सा पद्धतियां जवाब दे गई तब केवल योग ही मानवता का सहारा बन कर उभरा। जिसने भी योग को अपनाया वह मानवता के महत्व को समझने लग गया।
योग कई बीमारियों की एक औषधि हैं इसे सौ तालों की एक चाबी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज भारत ही नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व इसके महत्व को तेजी से समझ रहा है। यह विश्व की मानवता को जोड़ने वाला साधन है। आज कम उम्र में लोग कई बीमारियों व व्याधियों के शिकार हो रहे है जैसे- थायराइड, मधुमेह, रक्तचाप, माइग्रेन व तनाव इत्यादि। नियमित दिनचर्या में योगाभ्यास से इन रोगों का इलाज संभव है साथ ही मानसिक शांति व मानवता से जुड़ाव भी मुख्य विशेषता है। अन्य वस्तुएं आप सभी से अलग करेंगी लेकिन योग आपको मानवता के साथ-साथ संस्कृति, सेहत, समर्पण व देश सेवा से जोड़ेगा।
किसी ने सच ही कहा है – योग भगाये रोग।
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