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RKCL - RSCIT- EXAM
CHAPTER - 5

कंप्यूटर बूटिंग

कंप्यूटर को ऑन/ऑफ करने की प्रक्रिया को बूटिंग के नाम से जाना जाता है. यह प्रत्येक कंप्यूटर के सबसे पहली प्रक्रिया होती हैं. एक पर्सनल कंप्यूटर में सामान्यतः केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (सीपीयू) के डब्बे में ऑन/ऑफ का बटन होता है जिसे दबा कर हम कंप्यूटर को बूट करते हैं.

बूटिंग दो प्रकार के होते हैं- 

१)  कोल्ड बूटिंग - ऑन/ऑफ बटन दबा कर कंप्यूटर को खोलने की क्रिया को कोल्ड बूटिंग कहा जाता हैं.  

२)  वार्म बूटिंग -  अगर कंप्यूटर खुल गया हो परन्तु ऑफ न हो रहा हो या कोई प्रोग्राम फस गया हो तो कंप्यूटर को की-बोर्ड के Alt+Ctrl+Del दबा कर या फिर रिस्टार्ट बटन का उपयोग कर कंप्यूटर को बंद किया जाता हैं, यह प्रक्रिया को वार्म बूटिंग के नाम से जाना जाता है.

ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (GUI)

कंसोल मोड में हम केवल की-बोर्ड  का इस्तेमाल कर सकते थे, मगर कंप्यूटर पर जरूरत हुई शब्दों के अलावा ग्राफिक्स की भी तब एक नए प्रकार का प्रणाली को उपयोग में लाया गया जिसे ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस कहा जाता हैं. इसके आने से माउस का इस्तेमाल संभव हो सका.  इसमें आसानी से फोटो , वीडियो, ऑडियो  आदि को देखा या उसपर काम किया जा सकता हैं. हम साधारणतया आज जो भी ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं वो ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस पर ही आधारित होता हैं.  इसके आने के बाद कंप्यूटर ने आश्चर्यजनक रूप से अपना विकास किया और कंप्यूटर के साथ एक दोस्ताना माहौल कायम हो सका. जहाँ पहले डोस में एक छोटा फाइल बनाने के लिये लंबा आदेश लिखना पड़ता था वही बस माउस के एक – दो क्लिक से ही फाइल बनने लगा. डोस से लगभग सभी आदेशों को चित्र के माद्यम से दिखलाया जाने  लगा.

कंप्यूटर नेटवर्क - कंप्यूटर नेटवर्क आपस मे जुड़े कंप्यूटरों का समूह है जो एक दूसरे से संचार स्थापित करने तथा सूचनाओ, संसाधनों को साझा इस्तेमाल करने मे सक्षम होते है.

नेटवर्क के निम्नलिखित प्रकार होते है-

 लोकल एरिया नेटवर्क- LAN- (LOCAL AREA NETWORK)-  यह एक कंप्यूटर नेटवर्क है जिसके अंदर भौगोलिक परिधि सिमित होता है जैसे – घर, ऑफिस, भवनों का छोटा समूह आदि का कंप्यूटर नेटवर्क. वर्तमान लेन इथेर्नेट तकनीक पर आधारित होता है. इस नेटवर्क का आकार छोटा परन्तु डाटा संचारण की तीव्र गति होती है.

वाईड एरिया नेटवर्क – WAN- (WIDE AREA NETWORK)- इस नेटवर्क मे कंप्यूटर आपस मे लीज्ड लाइन या स्विच सर्किट के दुवारा जुड़े रहते हैं. इस नेटवर्क की भौगोलिक परिधि बड़ी होती है जैसे पूरा शहर, देश या महादेश मे फैला नेटवर्क का जाल. इन्टरनेट इसका एक अच्छा उदाहरण हैं. बैंको का ATM सुविधा वाईड एरिया नेटवर्क का उदाहरण हैं.

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क- MAN- (METROPOLITAN AREA NETWORK)- इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क एक साथ जुड़े होते हैं. यह एक शहर के सीमाओ के भीतर का स्थित कंप्यूटर नेटवर्क होता हैं. राउटर, स्विच और हब्स मिलकर एक मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क का निर्माण करता हैं.

विन्डोज़ की आन्तरिक/बाह्य एप्लिकेशन (सोफ्टवेयर)

जब कंप्यूटर मे ओपरेटिंग सिस्टम के तौर पर विन्डोज़ को लोड किया जाता है तो उसके साथ काम करने के लिए आवश्यक सोफ्टवेयर खुद ब् खुद लोड हो जाता है वहीँ विन्डोज़ का आन्तरिक एप्लिकेशन (सोफ्टवेयर) कहलाता है और जो सोफ्टवेयर विंडोज के लोड हो जाने के बाद अलग से किसी अन्य माध्यम से कंप्यूटर मे डाला जाता हैं उसे बाह्य एप्लिकेशन (सोफ्टवेयर) कहा जाता हैं.

आन्तरिक एप्लिकेशन के उदाहरण के लिए  

MS-PAINT   –  इस एप्लिकेशन का उपयोग चित्र बनाने के लिए किया जाता हैं.

CALCULATOR – अंकीय जोड़-घटा करने के लिए कैलकुलेटर का उपयोग किया जाता हैं.

INTERNET EXPLORER – इंटरनेट पर काम करने के लिए इस सॉफ्टवेर का उपयोग किया जाता हैं.

WINDOWS MULTIMEDIA-  गाना-विडियो सुनने और देखने के लिए इस सॉफ्टवेर का उपयोग किया जाता हैं.

WINDOWS MOVIE MAKER  – विडियो मे कुछ फेर बदल करने के लिए या जोड़ने आदि के लिए इस सॉफ्टवेर का उपयोग किया जाता हैं.

NOTEPAD – यह एक टेक्स्ट एडिटर प्रोग्राम होता हैं, अर्थात इसके अंतर्गत लिखने आदि का काम होता हैं. यह प्रोग्राम दिखाने मे जितना साधारण लगता है उससे बहुत ज्यादा शक्तिशाली प्रोग्राम होता है. एसा कोई भी कंप्यूटर भाषा जिसे कमपईल करने की आवश्कता नहीं होती उसे नोटपेड पर लिखा जा सकता है जैसे HTML – (Hyper Text Markup Language*)

WORDPAD – यह भी एक टेक्स्ट एडिटर प्रोग्राम है जिसके अंतर्गत हम कोई पत्र या शब्दों से संबन्धित किसी काम को सम्पादित कर सकते हैं. इसके प्रयोग से हम साधारण टाइप राइटर्स की तुलना मे कहीं अच्छे तरीके से लिखने का काम कर सकते है.

मोड्युलेशन -  यह किसी जानकारी को लंबी दूरी तक सिग्नल के रूप में भेजने के लिए उपयोग होता हैं. मोड्युलेशन डिजिटल सिग्नल को एनालॉग रूप में बदलने की प्रक्रिया हैं. यह मोडेम (MODEM- Modulator Demodulator) के दुवारा संभव होता हैं. मोडेम एक विद्युत यंत्र हैं जो डिजिटल सिग्नल को एनालॉग मे और एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल मे बदलने का काम करता हैं.  मोड्युलेशन तीन प्रकार के होते है-

१. आयाम (Amplitude) मोड्युलेशन (AM)- इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल का आयाम सूचना युक्त डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

२. आवृति (Frequency) मोड्युलेशन (FM)- इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल की आवृति को सूचना युक्त डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

३.- चरण (Phase) मोड्युलेशन (PM)-इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल के फेज को डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

इन्टरनेट का उपयोग - सामान्यतया  इन्टरनेट प्रयोक्ता केवल वर्ड-वाइड-वेब को ही इन्टरनेट का एकमात्र संसाधन समझता हैं. परन्तु सत्य यह हैं कि इन्टरनेट के दुवारा वेब उपयोग तथा ई-मेल के अतिरिक्त भी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं. इन सेवाओं में से कुछ सेवाओं का संछिप्त विवरण यहाँ प्रस्तुत हैं-

फ़ाइल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल – फ़ाइल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल का उपयोग एक कंप्यूटर नेटवर्क से किसी दूसरे कंप्यूटर नेटवर्क में फ़ाइल को भेजने करने के लिए किया जाता हैं. इस प्रोटोकॉल के दुवारा सर्वर से किसी अन्य कंप्यूटर पर फाईल भी कॉपी की जा सकती हैं.

इलेक्ट्रोनिक मेल-इलेक्ट्रॉनिक मेल को संछिप्त  रूप से ई-मेल कहा जाता हैं. इस माध्यम के दुवारा आप बड़ी से बड़ी सूचनाओ तथा संदेशों को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली दुवारा प्रकाश की गति से भेज या प्राप्त कर संकते हैं. ई-मेल दुवारा पत्र, ग्रीटिंग व कंप्यूटर के प्रोग्राम को दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी हिस्से में भेज सकते हैं. इसके बारे में हम आगे और भी विस्तार से पढेंगे.

गोफर- गोफर का अविष्कार अमेरिका के मिनिसोटा नामक विश्वविद्यालय में हुआ था. यह एक यूजर फ्रेंडली इंटरफेस हैं, जिसके माध्यम से यूजर इन्टरनेट पर प्रोग्राम तथा सूचनाओं का अदान-प्रदान कर सकता हैं. गोफर यूजर की वांछित सूचनाओं तथा प्रोग्राम को खोज कर यूजर के सामने रख देता हैं. इसका प्रयोग अत्यंत सरल हैं.

वर्ल्ड-वाइड-वेब -इन्टरनेट  का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन वर्ल्ड-वाइड-वेब  को समझा जाता हैं. इसे संछिप्त में ३ डब्लू www के दुवारा प्रदर्शित किया जाता हैं. वर्ल्ड-वाइड-वेब  के दुवारा यूजर अपना या अपनी संस्था का वेब पेज बना कर नेट पर रख सकता हैं. जिसे फिर दुनिया के किसी भी कोने से देखा जा सकता हैं.

टेलनेटडाटा के हस्तांतरण के लिए टेलनेट का उपयोग किया  जाता हैं. इस प्रोटोकॉल के इस्तेमाल से हम कहीं दूर अन्यत्र रखें कंप्यूटर पर अपना डाटा भेज या मंगवा सकते हैं. हम दूरस्थ कंप्यूटर को कण्ट्रोल भी  कर सकते हैं.

वेरोनिका – विरोनिका प्रोटोकॉल गोफर के माध्यम से काम करता हैं. इसके उपयोग से डाटाबेस तक पंहुचा जाता हैं.