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RKCL - RSCIT- EXAM
CHAPTER - 3

मल्टी प्रोसेसिंग
एक समय मे एक से अधिक कार्य को संपादित करने  के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी.पी.यू रहते है । इस तकनीक को मल्टी प्रोसेसिंग कहते है । मल्टी प्रोसेसिंग सिस्टम का निर्माण मल्टी प्रोसेसर सिस्टम को ध्यान मे रखते हुए किया गया है । 

एक से अधिक प्रोसेसर उपल्ब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसींग तीनो कार्यो के मध्य समन्वय रहता है । एक ही तरह के एक से अधिक सी.पी. यू का उपयोग करने वाले सिस्टम को सिमिट्रिक मल्टी प्रोसेसर सिस्टम कहा जाता है ।

मल्टी टास्किंग
मेमोरी मे रखे एक से अधिक प्रक्रियाओ मे परस्पर नियंत्रण मल्टी टास्किंग कहलाता है . किसी प्रोग्राम से नियत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था मे रहता है । मल्टी टास्किंग मे यूजर को ऐसा प्रतित होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे है 

ऑपरेटिंग सिस्टम - ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है

ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता - आपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर एवंसाफ्टवेयर के बिच सेतु का कार्य करता है कम्पयुटर का अपने आप मे कोई अस्तित्व नही है । यङ केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मानिटर , सी.पी.यू इत्यादि का समूह है आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बिच सम्बंध स्थापित करता है आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को कम्युटर के विभिन्न भागो की जानकारी रखने की जरूरत नही पडती है साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है यह सिस्टम के साधनो को बाॅटता एवं व्यवस्थित करता है।

आपरेटिंग सिस्टम के कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके सुपुर्द कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा किए जाते है । उदाहरण के लिए प्रिटिंग का कोई किया जाता है तो केन्द्रिय प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है । और वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है । इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना , डायरेक्टरी की विषय सूचि बदलना , डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किए जाते है । इसके अन्तर्गत निम्न कार्य आते है

1) फाइल पद्धति - फाइल बनाना, मिटाना एवं फाइल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना । फाइल निर्देशिका को व्यवस्थित करना ।

2) प्रक्रिया - प्रोग्राम एवं आंकडो को मेमोरी मे बाटना । एवं प्रोसेस का प्रारंभ एवं समानयन करना । प्रयोगकर्ता मध्यस्थ फाइल की प्रतिलिपी ,निर्देशिका , इत्यादि के लिए निर्देश , रेखाचित्रिय डिस्क टाप आदि

आपरेटिंग सिस्टम के प्रकार -

उपयोगकर्ता की गिनती के आधार पर आपरेटिंग सिस्टम को दो भागो मे विभाजित किया गया है
1)एकल उपयोगकर्ता - एकल उपयोगकर्ता आपरेटिंग सिस्टम वह आपरेटिंग सिस्टम है जिसमे एक समय मे केवल एक उपयोगकर्ता काम कर सकता है ।

2)बहुल उपयोगकर्ता  - वह आपरेटिंग सिस्टम जिसमे एक से अधिक उपयोगकर्ता एक ही समय मे काम कर सकते कर सकते है

काम करने के मोड के आधार पर भी इसे दो भागो मे विभाजित किया गया है ।

1)कैरेक्टर यूजर इंटरफेस  - जब उपयोगकर्ता सिस्टम के साथ कैरेक्टर के द्वारा सूचना देता है तो इस आपरेटिंग सिस्टम को कैरेक्टर यूजर इंटरफेस कहते है
उदाहरण डॉस, यूनिक्स

2)ग्राफिकल यूजर इंटरफेस  - जब उपयोग कर्ता कम्पयुटर से चित्रो के द्वारा सूचना का आदान प्रदान करता है तो इसे ग्राफिकल यूजर इंटरफेस कहा जाता है ।
उदाहरण विन्डो

डाटा क्या है?  असिध्द तथ्य अंक और सांख्यिकी का समूह, जिस पर प्रक्रिया करने से अर्थपूर्ण सूचना प्रप्ता होती है।

प्रक्रिया क्या है ?  डाटा जैसे- अक्षर, अंक, सकंख्यिकी या किसी चित्र को सुव्यवस्थित करना उनकी गणना करना प्रक्रिया कहलाती है। डाटा को संकलित कर, जाँचा जाता है और किसी क्रम में व्यवस्थित करनें के बाद संग्रहीत कर लिया जाता है, इसके बाद इसे विभिन्न व्यक्यि (जिन्हें सूचना की आवश्यकता है) को भेजा जाता है। प्रक्रिया में निम्नालिखित पदो का समावेश होता है।
गणना :-जोडना, घटाना, गुड़ा करना, भाग देना।
तुलना :बराबर , बड़ा छोटा, शून्य, धनात्मक ऋणात्मक ।
निर्णय लेना : किसी सर्त के आधार पर विभिन्न अवस्थाएँ।
तर्क: आवश्यक परिणाम को प्राप्त करने के लिए पदों का क्रम।
केवल स्ख्याओं (अंकों) की गणना को ही प्रक्रिया नहीं कहते हैं। कम्प्यूटर की सहायता से दस्तवेजो में त्रुटियाँ ढ़ूढ़ना, टैक्ट को व्यवस्थित करना आदि भी प्रक्रिया कहलाता है।

सूचना क्या है?  जिस डाटा पर प्रक्रिया हो चुकी हो,वह सूचना कहलाती है। अर्थपूर्ण तथ्य,अंक या सांख्यिकी सूचना होती है। दूसरो शब्दों में डाटा पर प्रक्रिया होने के बाद जो अर्थपूर्ण डाटा प्राप्त होता है, उसे सूचना कहतें। अनुरूपता की विभिन्न श्रेणियों का गुण रखने वाली उपयोगी सामग्री होती होती है-सूचना निम्नालिखित कारणों से अति-आवश्यक और साहायक होती है-
(a) यह जानकारी
(b) यह वर्तमान और भविष्य के लिए निर्यय लेने में सहायता करती है
(c) यह भविष्य का मूल्यांकन करने में सहायक है।

सूचना के गुण - हम जानते है कि सूचना किसी प्रणाली के लिए अति अवश्यक कारक हैं इस लिए सूचना में अग्रलिखित गुण होने चाहियेः
(a) अर्थपूर्णता
(b) विस्मयकारी तत्व
(c)पूर्व जानकारी से सहमति
(d)पूर्व जानकारी में सुधार
(e) संक्षिप्तता
(f)शुध्दता या यथार्थता
(g)समयबध्ता
(h) कार्य-संपादन में सहायक

कंप्यूटर लोजिक (तर्क शस्ति)

बोध के उपयोग की प्रक्रीया को लोजिक कहा जाता हैं. कंप्यूटर तंत्र के सॉफ्टवेर कंप्यूटर की बोध-तंत्र होते है जो वस्तुतः कार्यक्रम एवं क्रिया अनुक्रिया के दिशा निर्देश होते हैं. इन्हीं के अनुसार कंप्यूटर तंत्र कार्य करते हैं. इन दिशा निर्देशों के अनुपालन हेतु कंप्यूटर विद्युत संकेतों का उपयोग करते हैं. विद्युत संकेतों एवं सूचनाओ के द्विदिशी संपरिवर्तन को कंप्यूटर लोजिक कहा जाता हैं. दो प्रकार के कंप्यूटर लोजिक का उपयोग होता है जिन्हें अनुवर्ती / एनालोग तथा अंकीय / डिजिटल लोजिक कहा जाता हैं.

अनुवर्ती / एनालोग तर्क शस्ति/ लोजिक मे सूचना के परिणाम एवं उसके आवर्तन का यथावत निरूपण होता है. अतः कंप्यूटर तन्त्र मे विद्युत संकेत का परिणाम सूचना के परिणाम के समानुपाती होता है. एनालोग लोजिक के विद्युत संकेत सूचना उपलब्द्धि के समय से उसके परिणामस्वरूप अनवरत होते है. अंकीय लोजिक मे विद्युत संकेत अनवरत न हो कर उर्मियों के स्वरुप मे एक सुनिश्चित आवृत्ति पर अथवा सुनिश्चित अवधि के लिये उपस्तिथ होते हैं.

कंप्यूटर ब्लॉक आरेख - इनपुट क्रिया

कंप्यूटर पर कोई भी काम पहले से निर्धारित तरीके के अनुसार ही सम्पन्न होता हैं. अर्थात अगर हम की-बोर्ड पर “अ” बटन दबाते है तो वह एक निश्चित प्रक्रीया को पूरा करते हुए ही  हमें मोनिटर पर “अ” के रूप में दिखलाई पड़ता हैं.  कंप्यूटर में कोई भी डाटा डालने की क्रिया को इनपुट क्रिया कहते हैं. कंप्यूटर में इनपुट का काम की-बोर्ड या मोउस के द्वारा किया जाता है. जब हम की-बोर्ड में कोई एक बटन दबाते हैं तो वह संकेत केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई को भेजता हैं. वहाँ कण्ट्रोल में जाँच प्रक्रिया के बाद संकेत रजिस्टर में जाता हैं जहाँ प्रांभिक मेमोरी में जाने के बाद वह संकेत दिखने के लिये आउटपुट में भेज दिया जाता हैं. आउटपुट का काम संकेतों को आकृति में दिखाने के लिये किया जाता हैं. जो मुख्यतः मोनिटर या प्रिंटर होते है. मोनिटर में दिखने वाली कॉपी को सोफ्ट कॉपी और प्रिंटर से निकाले गए कॉपी को हार्ड कॉपी कहा जाता हैं.

विंडोज xp जानकारी

प्रारम्भ में कंप्यूटर पर ग्रफिक्स, ओडियो आदि से संबन्धित काम नहीं किया जा सकता था, इसके फलस्वरुप G.U.I (ग्राफिकल यूजर्स इंटरफेस ) का खोज किया गया. इसके आने के बाद जिस कंप्यूटर को बहुत जटिल माना जाता था उसका उपयोग करना बहुत ही आसान हो गया. बड़े बड़े कंप्यूटर आदेशों को चित्र के दुवारा प्रदर्शित करना संभव हो गया. और कंप्यूटर का इस्तेमाल जो पहले केवल वैज्ञानिक करते थे ग्राफिकल यूजर्स इंटरफेस के आने के बाद साधारण लोग भी करने लगे.

विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम को इतना सरल बनाया गया की यूजर्स के साथ एक दोस्ताना सबंध कायम रह सके. दूसरे तरीके से देखा जाए तो, अगर हम अपने कार्य करने वाले कमरे को गौर से देखे तो हमें क्या नजर आयेगा? एक चादर बिछा टेबल, एक घड़ी, कलेण्डर, कचरा फेकने के लिए कूड़ादान, कॉपी कलम, दस्तावेज़ रखने के लिए अलमीरा इत्यादी. विंडोज को भी इस प्रकार के बनाया गया की किसी भी इस्तेमालकर्ता के लिए एक जाना पहचाना माहौल काम करने के लिए मिल सके. जब हम विन्डोज़ खोलते हैं तो कुछ इस प्रकार का स्क्रीन नजर आता है जहाँ इस्तेमाल किया जाने वाले सामानों को कुछ अलग नाम से जाना जाता हैं.

डेटा कम्यूनिकेशन माध्यम (Data Communication Medium)

एक कंप्यूटर से टर्मिनल या टर्मिनल से कंप्यूटर तक डाटा के प्रवाह के लिए किसी माध्यम की अवश्यकता होती हैं जिसे कम्यूनिकेशन लाइन या डाटा लिंक कहते हैं. ये निम्न प्रकार के होते है –

  • स्टैंडर्ड टेलीफोन लाइन (Standard Telephone Line)
  • को-एक्सेल केबल (Coaxial-Cable)
  • माइक्रोवेव ट्रांसमिशन (Microwave Transmission)
  • उपग्रह संचार (Satellite Communication)
  • प्रकाशीय तंतु (Optical Fiber)

स्टैंडर्ड टेलीफोन लाइन (Standard Telephone Line) – यह व्यापक रूप से उपयोग होने वाला डाटा कम्यूनिकेशन माध्यम हैं. इसके ज्यादा प्रभावी रूप से होने का कारण यह है की इसे जोड़ना सरल हैं तथा बड़ी मात्रा मे टेलीफोन केबल लाइन उपलब्ध है. ये दो तांबे के तार होते हैं जिनपर कुचालक की एक परत चढ़ी होती हैं. 

को-एक्सेल केबल (Coaxial-Cable)- यह उच्च गुणवत्ता के संचार के माध्यम है. ये जमीन या समुन्द्र के नीचे से ले जाए जाते हैं. को-एक्सेल केबल के केन्द्र मे एक ठोस तार होता हैं जो कुचालक से चारों तरफ घिरा होता हैं. इस कुचालक के ऊपर तार की एक जाली होती हैं जिसके भी ऊपर एक और कुचालक की परत होती हैं. ये टेलिफोन तार की तुलना मे बहुत महगा होता है पर ये अधिक डेटा को ले जा सकता हैं. इसका उपयोग केवल टीवी नेटवर्क या फिर कंप्यूटर नेटवर्क मे किया जाता हैं

माइक्रोवेव ट्रांसमिशन (Microwave Transmission) –इस सिस्टम मे सिग्नल खुले जगह से होकर रेडियो सिग्नल की तरह संचारित किये जाते हैं. यह स्टैंडर्ड टेलिफोन लाइन और को-एक्सेल केबल की तुलना मे तीव्र गति से संचार अदान प्रदान करता हैं. एक सिस्टम मे डाटा एक सीधी रेखा मे गमन करती है तथा एंटीना की भी आवश्कता होती हैं. लगभग तीस किलोमीटर पर एक रिले स्टेशन की भी जरुरत होती है. इसका उपयोग टीवी प्रसारण और सेलुलर नेटवर्क मे किया जाता हैं. 

 उपग्रह संचार (Satellite Communication)- उपग्रह संचार तीव्र गति के डेटा संचार का माध्यम है. यह लंबी दूरी के संचार के लिए आदर्श माना जाता हैं. अंतरीक्ष मे स्थित उपग्रह को जमीन पर स्थित स्टेशन से सिग्नल भेजा जाता है. उपग्रह उस सिग्नल का विस्तार कर दूसरे जमीनी स्टेशन को पुनः भेजता है. एक सिस्टम मे विशाल डेटा के समूह को कम समय मे अधिकतम दूरी पर भेजा जाता हैं. इसका उपयोग उपग्रह फोन, टीवी, इन्टरनेट और कई वैज्ञानिक कारण से किया जाता हैं.

प्रकाशीय तंतु (Optical Fiber)- यह एक नई तकनीक हैं जिसमे धातु के तार या केबल के जगह विशिष्ट प्रकार के ग्लास या प्लास्टिक तंतु का उपयोग किया जाता हैं. ये बहुत ही हलकी और और बहुत ही तेजी से डाटा अदान प्रदान करने मे कारगर होती हैं. यह प्रकाश को आधार बना कर उसी के माध्यम से डाटा को भेजती है. यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता हैं. यह रेडियो आवृति अवरोधों से मुक्त होता हैं. आज हरेक छेत्र मे इसका उपयोग किया जाता हैं. आपने बहुत से जगह टेबल पर रखा पतले पतले तारो से लाइट निकलने वाला सजाने का सामान देखा होगा ये उसी के सिद्धांत पर काम करता हैं.

डेटा ट्रांसमिशन सेवा (Data Transmission Service)

डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए जिस सेवा का उपयोग होता हैं उसे डेटा ट्रांसमिशन सेवा कहते हैं. इस सेवा को देने वाले को डेटा ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता (Data Transmission Service Provider) कहते हैं. जैसे-

1. VSNL- विदेश संचार निगम लिमिटेड 

2. BSNL- भारत संचार निगम लिमिटेड 

3. MTNL- महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड

 

डेटा ट्रांसमिशन सेवा निम्नलिखित हैं-

१.      डायल अप लाइन (Dialup Line) – डायल अप लाइन टेलीफोन कनेक्शन से सम्बंधित हैं जो एक सिस्टम में बहुत सारे लाइनों तथा यूजर्स से जुड़ा होता हैं. इसका उपयोग टेलीफोन की तरह नंबर डायल कर संचार स्थापित करने में किया जाता हैं. इसे कभी कभी स्विच लाइन भी कहा जाता हैं. यह पहले से विद्यमान टेलीफोन सेवा का उपयोग करता हैं. ब्रॉडबैंड तकनीक भी डायल उप कनेक्शन का ही उपयोग करता हैं.

२.      लीज्ड लाइन (Leased Line) – लीज्ड लाइन आवाज और डेटा दूरसंचार सेवा के लिए दो स्थानों को जोड़ती हैं. यह एक सिर्फ, समर्पित लाइन (Dedicated Line) नहीं हैं, बल्कि यह वास्तव में दो बिंदु के बीच आरक्षित सर्किट हैं. इसका सबसे ज्यादा उपयोग उद्यगो दुवारा अपने शाखाओं को जोड़ने के लिए किया जाता हैं क्यूंकि यह नेटवर्क ट्राफिक के लिए बैंडविड्थ की गारण्टी देता हैं.

३.      एकत्रित सेवा डिजिटल नेटवर्क (ISDN- Integrated Services Digital Network)– एकत्रित सेवा डिजिटल नेटवर्क सर्किट स्विच टेलीफोन नेटवर्क के माध्यम से आवाज, डेटा और छवी का स्तान्तरण हैं. इस सेवा के अंतर्गत आवाज, डेटा और छवी को डिजिटल रूप में भेजा जाता हैं और जरुरत के अनुरूप इस्तेमाल किया जाता हैं. इस सेवा में मोडेम की जरुरत नहीं होती क्यूंकि डेटा का आदान प्रदान केवल डिजिटल रूप में होता हैं.

मोडेम (MODEM- Modulator Demodulator)

जब इन्टरनेट को टेलीफोन लाइन के माद्यम से कनेक्ट करते हैं तो मोडेम की अवश्यकता होती हैं. यह कंप्यूटर में चल रहे इन्टरनेट ब्रोजर और इन्टरनेट सर्विस प्रदाता के बीच आवश्यक लिंक हैं. टेलीफोन लाइन पर एनालोग सिग्नल भेजा जा सकता हैं, जबकि कंप्यूटर डिजिटल सिग्नल देता हैं. अतः इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए मोडेम की अवश्यकता होती हैं, जो डिजिटल सिग्नल को एनालोग में और एनालोग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में रूपांतरित करता हैं. मोडेम के दोनों ओर कंप्यूटर ओर टेलीफोन लाइन से जुड़ा होना अवश्यक होता हैं. मोडेम से स्पीड को  Bit Per Second (BPS), Kilobyte Per Second (KBPS), Megabyte Per Second (MBPS),  में मापा जाता हैं.

मोडेम मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –

अ)     इंटरनल (आंतरिक) मोडेम – ऐसा मोडेम जो डेस्कटॉप या लैपटॉप में अंदर से ही लगा होता हैं. ऐसा मोबाइल जिसमे हम इन्टरनेट का प्रयोग करते हैं, उसमे इसी प्रकार के मोडेम का इस्तेमाल किया  जाता हैं.

आ)   एक्स्टर्नल (बाह्य) मोडेम- ऐसा मोडेम जिसे डेस्कटॉप या लैपटॉप में बाहर से लगाना पड़ता हैं. डेटा कार्ड (Photon, IDIA etc) या PCMCI में इस प्रकार के मोडेम का उपयोग किया जाता हैं.

अतः मोडेम एक ऐसा डिवाइस हैं जो डेटा को पल्स में परिवर्तित करता हैं तथा उन्हें टेलीफ़ोन लाइन पर संप्रेषित करता हैं.