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Rajasthan Mediclaim Insurance Scheme

राजस्थान सरकार - मेडीक्लेम बीमा पॉलिसी

1. सामान्य परिचय - मेडिक्लेम पॉलिसी 1-1.2004 एवं उसके पश्चात नियुक्त राज्य कार्मिकों पर लागू है। इसके तहत् कार्मिक एवं परिजनों को निर्धारित अधिकतम बीमाधन की सीमा तक इण्डोर रहकर ईलाज करवाने की सुविधा प्रदान की जाती है। राज्य सेवा में नियमित भर्ती की दिनांक से राज्यकर्मी इस पाॅलिसी का लाभ प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है। अर्थात प्रोबेशन अवधि में भी राज्यकर्मी को मेडिक्लेम पाॅलिसी के समस्त लाभ प्राप्त हो जाते है।

2. प्रीमियम एवं बीमाधन - राज्यकर्मियों के लिए समस्त प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। प्रायः कार्मिकों में यह धारणा रहती है कि उसके वेतन से प्रीमियम राशि की कटौती होती है। इस जानकारी के अभाव में कार्मिकों द्वारा न्यायिक वाद भी दायर कर दिये जाते है। वर्तमान में राज्यकर्मियों की मेडिक्लेम पाॅलिसी में बीमाधन की अधिकतम सीमा 3 लाख रूपये निर्धारित है। बीमित व्यक्ति अपने एवं अपने परिजनों के ईलाज के लिए एक पाॅलिसी वर्ष में अधिकतम रूपये 3 लाख तक की चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकता है।

3. परिवार - मेडिक्लेम पाॅलिसी की परिवार की परिभाषा में कार्मिक के पति/पत्नि, 21 वर्ष तक आयु की अविवाहित 2 संताने एवं आश्रित माता-पिता जो प्रायः कार्मिक के पदस्थापन के स्थान पर साथ रहते है एवं जिनकी औसत मासिक आय 2000/- से कम है, शामिल किये जाते है।

4. चिकित्सालय - मेडिक्लेम पाॅलिसी के अन्तर्गत कार्मिक तीन तरह के चिकित्सालयों में ईलाज की सुविधा प्राप्त कर सकता है।

  •  राज्य में स्थित सभी राजकीय चिकित्सालय
  •  राज्य के बाहर अनुमोदित चिकित्सालय
  •  अनुमोदित निजि चिकित्सालय 

पाॅलिसी के अन्तर्गत विभाग द्वारा उन्हीं चिकित्सालयों को अनुमोदित किया गया है जो सिविल सर्विसेज मेडिकल अटेन्डेंस रूल 2013 के तहत् राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित है। सभी अनुमोदित चिकित्सालयों द्वारा राज्य सरकार एंव विभाग को सी.जी.एच.एस. पैकेज एवं दरों पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करनें की अण्डरटेकिंग दी हुई है, अतः वे सी.जी.एच.एस. दरों पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने हेतु बाध्य है। अनुमोदित चिकित्सालयों की अपडेटेड जानकारी वित्त विभाग की वेबसाईट पर उपलब्ध है।

5.  इन्डोर अवधि - मेडिक्लेम पाॅलिसी का लाभ प्राप्त करने के लिये 24 घंटे से अधिक अस्पताल में भर्ती रहना आवश्यक है। 24 घंटे से कम भर्ती रहकर करवाये गये ईलाज के कोई पुर्नभरण देय नहीं होगा।

6.  डे-केयर सुविधा - कुछ बीमारियां ऐसी है जिनमें 24 घंटे भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है जिसे डे-केयर के नाम से जाना जाता है, इनमें भी पुनर्भरण की सुविधा प्राप्त है जैसे - डायलेसिस, कीमोथेरेपी, रेडियोथैरेपी, आंख की सर्जरी दुर्घटना की स्थिति में दांत की सर्जरी, किडनी स्टोन को हटाना, डी एण्ड सी आदि।

7.  पुनर्भरण की दर - बीमित कार्मिक को दावा राशि का पुनर्भरण सी.जी.एच.एस. के पैकेज दरों पर किया जावेगा। राज्य में किसी भी अनुमोदित निजि अस्पताल में ईलाज पर जयपुर शहर की सी.जी.एच.एस. दरें लागू होगी। राज्य के बाहर ईलाज करवाये जाने पर संबंधित शहर की सी.जी.एच.एस. दरें लागू होगी।

8.  कैशलेस सुविधा (नकदविहीन सुविधा) - नकदविहीन सुविधा का तात्पर्य है कि बीमित कार्मिक को ईलाज के समय अनुमोदित निजि चिकित्सालय में भुगतान नहीं करना पडता है। ईलाज की राशि का भुगतान विभाग द्वारा संबंधित चिकित्सालय का किया जाता है। मेडिक्लेम पाॅलिसी के अन्तर्गत यह सुविधा निम्न गंभीर बीमारियों तक ही सीमित है।  

Caronary Artery Surgery

Cancer

Renal Failure i.e. Failure of Both Kidneys

Stroke

Multiple Sclerosis

Meningistis

Major Organ Transplant like kidney, Lung Pancreas, Bone marrow.

9.  प्री हाॅस्पिटलाईजेशन सुविधा - इसका तात्पर्य उस अवधि से है जिसमें बीमित भर्ती रहकर ईलाज करवाने से पूर्व आउटडोर ईलाज करवाता है। इस पाॅलिसी के अन्तर्गत भर्ती रहकर ईलाज करवाने के 30 दिन पूर्व तक आउटडोर ईलाज का पुनर्भरण प्राप्त किया जा सकता है।

10.  पोस्ट हाॅस्पिटलाईजेशन - यह वह अवधि होती है जिसमें बीमित अस्पताल से डिस्चार्ज होने के पश्चात चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकता है। इस मेडिक्लेम पाॅलिसी में बीमित अस्पताल से डिस्चार्ज के पश्चात के 45 दिन के ईलाज खर्च का पुनर्भरण प्राप्त कर सकता है।

11.  मैटरनिटी लाभ - इस पाॅलिसी के अन्तर्गत बीमित कार्मिक अधिकतम प्रथम दो जीवित संतानों तक मेटरनिटी लाभ प्राप्त कर सकता है। एक पाॅलिसी वर्ष में मैटरनिटी लाभ की अधिकतम सीमा 50 हजार रूपये निर्धारित है। मैटरनिटी लाभ की सीमा निम्नानुसार है।

  • सामान्य प्रसव - अधिकतम 10 हजार रू
  • सीजेरियन प्रसव - अधिकतम 20 हजार रू
  • जटिल प्रसव - अधिकतम 50 हजार रू

      (50 हजार की सीमा में चाईल्ड केयर भी शामिल है।)

वे परिस्थितियां जिनमें बीमित कार्मिक को मेडिक्लेम पाॅलिसी का लाभ नहीं मिल सकता है।

  1. आउटडोर ईलाज
  2. सामान्य परिस्थितियों में गैर अनुमोदित चिकित्सालय में ईलाज
  3. ऐसी जांचे जिनमें बीमित द्वारा 24 घंटे भर्ती रहकर ईलाज नहीं करवाया है।
  4. जानबूझकर स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य, नशीले एवं जहरीले पदार्थों के सेवन से उत्पन्न बीमारी की स्थिति
  5. आंखो के चश्में, कान में लगाये जाने वाले उपकरण
  6. सौन्दर्य बढाने हेतु दांतों की सर्जरी एवं प्लास्टिक सर्जरी
  7. विटामिन एवं टाॅपिक का पुनर्भरण
  8. प्राकृतिक चिकित्सा
  9. जन्मजात विकृतियां एवं बीमारियां
  10. परमाणु यु़द्ध से उत्पन्न होने वाली बीमारियां आदि

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