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एकीकृत महासंघ बिंदूवार स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष प्रस्तुत करेगा

महासंघ एकीकृत की सातवें वेतन आयोग पर समीक्षा बैठक में निर्णय
सातवें वेतन आयोग में रही कमियों तथा एरियर के मुद्दे पर कल दिनांक 5 नवम्बर 2017 को जयपुर के जल भवन में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत की प्रदेश कार्यकारिणी जिला अध्यक्ष एवं जिला मंत्रियों की बैठक हुई। बैठक में एरियर के भुगतान तथा 5400 से नीचे ग्रेड पे वाले कर्मचारियों के वेतन के संबंध में वेतन आयोग में रही खामियों पर आक्रोश दिखा। वक्ताओं नें इसमें वित्त विभाग के अधिकारियों तथा लेखा सेवा के अधिकारियों को दोष देते हुए कहा कि इनकी कारगुजारियों के कारण निचले स्तर के कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है। न्यूनतम वेतन में भी केन्द्र से भिन्नता रखी गयी है।
कर्मचारियों ने पुनः सामंत कमेटी के गठन पर और छः माह का समय देने पर आपत्ति जताते हुए इस बहुत लम्बा कार्यकाल बताया और इस समय अवधि को कम किये जाने की मांग की।
महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष महेेन्द्र सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की भावना के अनुरूप वेतन आयोग में रही कमियों के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया जावेगा। उन्होने कहा कि वेतन आयोग मुख्यमंत्रीजी के साथ महासंघ की वार्ता में उनकी मंशा के अनुरूप लागू नहीं किया गया है। उन्होने कर्मचारियों से आश्वासन दिया कि भले ही सावंत कमेटी को एरियर जैसे मुद्दे पर छः माह का समय दिया है परन्तु वे वादा करते है कि बहुत शीघ्र ही एरियर के मुद्दे पर मुख्यमंत्रीजी से वार्ता कर कोई न कोई निर्णय करवा लेंगे। उन्होने बताया कि भले ही व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से कागजी नेता बिना वेतन आयोग को समझे आक्रोश जताते हों, परन्तु महासंघ एकीकृत क्योकिं एक संजीदा एवं स्थापित संगठन है इसलिये बिना पूरी तरह अध्ययन किए और जिलों से फीडबैक लिए कोई कदम नहीं उठा सकता उन्होंने कहा कि आज की बैठक में जिलाध्यक्षों के माध्यम से और संगठनों के पदाधिकारियों के माध्यम से जो फीडबैक मिला है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों की मंशा के अनुरूप केन्द्र से समानता रखते हुए वेतन आयोग का लाभ नहीं दिया गया है। प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि एकीकृत महासंघ मुख्यमंत्री को बिंदूवार स्पष्ट करते हुए कर्मचारियों का पक्ष रखेंगे और आशा है मुख्यमंत्री महोदया से वार्ता के बाद निश्चित रूप से कोई न कोई ठोस कदम कर्मचारियों के पक्ष में ही होगा।

 

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