Menu

► Question 9 : वित्तीय वर्ष 2019-20 के आयकर के सभी प्रावधानों से अवगत करावे

Question 8 : वित्तीय वर्ष 2019-20 के आयकर के सभी प्रावधानों से अवगत करावे.

Answer : वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आयकर से महत्वपूर्ण जानकारियां निम्न प्रकार उपलब्ध है.

आयकर गणना प्रपत्र 
2019-20
Picture

आयकर के महत्वपूर्ण प्रावधान
  वित्तीय वर्ष 2019-20 (निर्धारण वर्ष 2020-21)  

मकान किराया रसीद 
Picture

 

प्रिय साथियो, सादर नमन् ।  आयकर वित्तीय वर्ष 2019-20 चल रहा है जिसमें आपको विनियोग, आयकर छूट एवं अन्य आवश्यक घोषणा अपने नियोक्ता को उपलब्ध करवाकर अंतिम कर देयता निर्धारित करनी है। लेकिन आयकर सम्बन्धी अनेक बिन्दुओं पर आपकी जानकारी स्पष्ट नहीं होने से भ्रम की स्थिति रहती है, हालांकि आयकर कानून बहुत व्यापक है, उसकी संक्षिप्त में व्याख्या करना कठिन कार्य है फिर भी टीम rajsevak.com  ने प्रयास किया है कि ’’वेतन से आय’’ शीर्षक के अन्तर्गत प्रमुख बिन्दुओं पर आपको जानकारी उपलब्ध हो सके। हमारी टीम द्वारा सूचना प्रस्तुतीकरण में पूर्ण सावधानी बरती है कि आपकी प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध करा सके, लेकिन फिर आपको सलाह दी जाती है कि अंतिम निर्णय अपने प्रमाणित कर सलाहकार से राय के उपरांत ही लेवें। अन्य कोई जानकारी हेतु आप हमें अवगत करावें।

=====================================================================================

वित्तीय वर्ष से अभिप्राय   आयकर की गणना में वित्तीय वर्ष से अभिप्राय 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि होती है, तथा इस दौरान प्राप्त आय इस वित्तीय वर्ष की मानी जाती है। चूंकि किसी वर्ष की आय पर आयकर का निर्धारण वर्ष समाप्ति के पश्चात अगले वर्ष किया जाता है अतः अगले वर्ष को कर निर्धारण वर्ष कहा जाता है। इसलिये जिस वर्ष में आय अर्जित की जाती है उस वर्ष को गतवर्ष के रूप में जाना जाता है। सामान्यतः माह मार्च का वेतन 1 अप्रैल को तथा आगामी वर्ष के फरवरी माह का वेतन मार्च को प्राप्त होता है इसलिये मार्च से आगामी वर्ष की फरवरी माह तक के वेतन को आयकर विवरणिका में शामिल किया जाता है। फिर भी वेतन की गणना करने के लिये यह देखना होगा कि वेतन कब उपार्जित हुआ है अथवा कब प्राप्त हुआ है, इन दोनों परिस्थितियों में जो भी पहले हो के अनुसार उसके अनुसार कर योग्य माना जावेगा। निम्न बिन्दूओं से आप स्थिति को अधिक स्पष्ट कर सकते है। 

वेतन एवं वेतन अवधि की विवेचना
प्राप्त वेतन
यदि गतवर्ष में कोई पिछला वेतन प्राप्त हुआ है तथा उस पर सम्बन्धित वर्ष में उपार्जन के आधार पर कर नहीं लग चुका है तो उस पर प्राप्ति के आधार पर कर लगाया जावेगा।
उपार्जित वेतन
यदि गतवर्ष में उपार्जित वेतन का भुगतान नहीं हुआ है तो उस पर गतवर्ष में ही कर लगाया जावेगा।
एडवांस वेतन
यदि किसी कर्मचारी को नियोक्ता ने अग्रिम वेतन दिया है तो वह प्राप्ति वाले वर्ष में टैक्स देय होगा। 
एरियर का भुगतान
यदि गतवर्ष में कोई एरियर प्राप्त हुआ है तो वह भी गतवर्ष में कर योग्य होगा बशर्ते वह राशि उपार्जित होने वाले वर्ष में पहले ही कर योग्य न की गई हो। किन्तू एरियर पर धारा 89 की छूट का दावा किया जा सकता है।
बोनस, कमीशन, फीस इत्यादि
यदि कर्मचारी को अपने नियोक्ता से कोई बोनस, कमीशन अथवा फीस प्राप्त होती है तो वह जिस वर्ष में प्राप्त होगी वह वेतन के अन्तर्गत ही प्राप्ति वर्ष में कर योग्य होगी।
पेंशन
सभी राजकीय कर्मचारियों एवं गैर राजकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के उपरांत प्राप्त होने वाली मासिक पेंशन पूर्णतः कर योग्य होगी। यह देय होने वाले वर्ष में कर योग्य होगी।
अवकाश के बदले नकदीकरण
एक सरकारी कर्मचारी को राजसेवा में रहते हुए यदि अवकाश के बदले कोई नकदीकरण होता है तो पूर्णत कर योग्य होगा। तथा यदि सेवानिवृत्ति पर राजकीय कर्मचारी अवकाश के बदले नकदीकरण प्राप्त होता है तो वह राशि पूर्णतयः कर मुक्त होगी।
=============================================================================================================
सकल वेतन की गणना
वेतन
वेतन में मूल वेतन, मंहगाई वेतन, ग्रेड-पे, अवकाश वेतन, अग्रिम वेतन, वकाया वेतन, नवीन पेंशन योजना में सरकार का अंशदान, बोनस, कमीशन, फीस, विशेष वेतन, निर्वाह भत्ता आदि सम्मिलित किये जाते है।
कर योग्य भत्ते
महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, सीसीए, प्रतिनियुक्ति भत्ता, अंतरिम राहत, एनपीए, नौकर भत्ता, मेडिकल भत्ता, परियोजना भत्ता आॅवरटाईम भत्ता, वार्डन भत्ता, टिफिन भत्ता (मकान किराया कुछ परिस्थितियों में कर मुक्त है)
कर मुक्त भत्ते
विदेश भत्ता पूर्णतः करमुक्त होता है।
वास्तविक व्यय की सीमा तक कर मुक्त
आॅफिस कार्य हेतु आने-जाने, आॅफिस कार्य या ट्रांसफर के लिये की गयी यात्रा, आॅफिस के कार्य के निष्पादन हेतु हैल्पर रखने, अनुसंधान खर्च एवं पोशाक भत्ता वास्तविक व्यय की सीमा तक कर मुक्त होंगे।
==============================================================================================
मकान किराया भत्ता
यदि कोई कर्मचारी स्वयं के मकान में रहता हैं अथवा अथवा अन्य किसी के मकान में रहता है जिसके लिये उसके द्वारा कोई भी राशि किराये के रूप में भुगतान नहीं की जा रही है तो मकान किराया भत्ता पूर्णतः कर योग्य होगा। यदि कोई कर्मचारी किराये के मकान में रह रहा है तो कर्मचारी को मकान किराया भत्ते में निम्न में से सबसे कम राशि की छूट दी जावेगी।
1.    वर्ष के दौरान प्राप्त वास्तविक मकान किराया भत्ता
2.    वेतन के 10% से अधिक चुकाया गया मकान किराया
3.    वेतन का 40%  (दिल्ली, मुम्बई, कोलकता एवं चैन्नई के लिए वेतन का 50%)
NOTE :  मकान किराये में छूट हेतु वेतन से अभिप्राय मूल वेतन, ग्रेड पे, मंहगाई भत्ते के याग से है।
Remarks about HRA
1. Though incurring actual expenditure on payment of rent is a pre-requisite for claiming deduction under section 10(13A), it has been decided as an administrative measure that salaried employee drawing house rent allowance up to 3000 per month will be exempted from production of rent receipt. It may, however be noted that this concession is only for purpose of Tax deduction at source, and in the regular assessment of the employee, the Assessing Officer will be free make such enquiry as he deems fit for the purpose of satisfying himself that the employee has incurred actual expenditure on payment of rent.
2.  यदि कर्मचारी द्वारा प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक मकान किराया चुकाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसे मकान मालिक का पेन संख्या नियोक्ता को उपलब्ध कराना आवश्यक है। और यदि मकान मालिक के पास पेन सं0 उपलब्ध नहीं है तो मकान मालिक से इस आषय की घोषणा मय मकान मालिक के नाम एवं पता सहित प्राप्त कर नियोक्ता को उपलब्ध करानी होगी।
3.   मकान किराये की छूट हेतु किरायानामा की प्रति नियोक्ता का उपलब्ध कराये जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
==============================================================================================

Individual Assessee : व्यक्ति (निवासी अथवा अनिवासी (Non-Resident)) अथवा हिंदु अविभाजित परिवार (HUF) अथवा व्यक्तियों के संघ (AOP) अथवा व्यक्तियों की निकाय (Body of Individual) अथवा अन्य किसी कृत्रिम कानूनी व्यक्ति (Artificial Person) की स्थिति में निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए आयकर की दरें निम्न प्रकार हैं :

करयोग्य आय (Taxable Income)कर की दर
रू. 2,50,000 तकशून्य
रू. 2,50,000 – 5,00,0005 %
रू. 5,00,000 – 10,00,00020 %
रू. 10,00,000 से अधिक30 %

 

निवासी वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen) की स्थिति में (जो पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ (60) वर्ष की आयु अथवा उससे अधिक का हो लेकिन पिछले वर्ष के अंतिम दिन पर अस्सी (80) वर्ष की आयु से कम का हो) निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए आयकर की दरें निम्न प्रकार हैं :

करयोग्य आय (Taxable Income)कर की दर
रू. 3,00,000 तकशून्य
रू. 3,00,001 – 5,00,0005 %
रू. 5,00,000 – 10,00,00020 %
रू. 10,00,000 से अधिक30 %

 

About 80TTA and 80TTB

  1. Section 80TTA : grants a deduction on savings account interest up to Rs 10,000 per annum. It applies to all individuals and HUFs other than senior citizens (those above 60).
  2. Section 80TTB : Senior citizens can instead take advantage of a bigger deduction of Rs 50,000 per annum on both savings and FD interest under Section 80TTB.
  3. Savings Account Interest : above Rs 10,000 is taxable under the head ‘Income from Other Sources’ at your slab rate.
  4. निष्कर्ष - 60 वर्ष तक के करदाता को बचत खाता / खातों के कुल ब्याज की अधिकतम Rs. 10,000/- की छूट 80TTA के तहत् देय होगी FD/RD के ब्याज पर छूट नहीं मिलेगी.

प्रश्न ? मैं अपनी पत्नी के साथ उसके नाम मौजूद मकान हेतु किराये का अग्रीमेंट करता हूं, तो क्या मैं एचआरए लाभ का दावा कर सकता है?
उत्तर : यह एक उचित कर उपाय नहीं है। एचआरए को छूट के रूप में दावा करने के लिए धारा 10 (13 ए) का उद्देश्य उन कर्मचारियों की मदद करना है जो रोजगार के लिए अपने कार्यस्थल या कभी-कभी किसी अन्य शहर में रहने के लिए मजबूर हैं। जहां आप अपनी पत्नी को किराए का भुगतान करने की व्यवस्था में शामिल हो जाते हैं और फिर HRA छूट का दावा करते हैं, यह कानून के ढांचे के भीतर नहीं कहा जा सकता है क्योंकि एक पति और एक पत्नी, आमतौर पर, एक व्यावसायिक संबंध साझा नहीं करते हैं। यदि ऐसी व्यवस्था आयकर विभाग की नजर में आती है, तो इसे कर चोरी के रूप में देखा जा सकता है।

About HRA Rebate

  1. मकान किराए की रिबेट उस कार्मिक को मिलेगी जो अपने पदस्थापन स्थान पर किराए के मकान में रह रहा हो।
  2. जिसका पोस्टिंग प्लेस हेडक्वार्टर पर स्वयं का मकान नही है और होम लोन अपने निवास स्थान पर मकान निर्माण के लिए लिया है,  होम लोन लेकर मकान निर्माण पूर्ण कर लिया है और उस मकान को किराए पर दिया है तो वह इनकम Other income from house property में show करनी होगी।
  3. जिस स्थान पर पोस्टिंग है और वही आपने होम लोन लेकर मकान बनाया है तो आपको HRA की छूट नही मिलेगी।

Note :

  1. स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) एक निश्चित राशि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 50,000 है, जो टैक्स योग्य आय की गणना से पहले आपकी सैलरी से काट ली जाती है. यह साल 2005-06 तक आयकर अधिनियम का हिस्सा था, जब तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इसे हटा दिया था.
  2. अधिभार (Surcharge): आयकर की राशि ऐसे कर के 10% की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो। हालांकि, अधिभार (Surcharge) सीमांत राहत (marginal relief) के अनुसार ही देयहोगा। (अर्थात जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो वहां आयकर तथा अधिभार के रूप में देययोग्य कुल राशि आय, जो एक करोड़ रूपए से अधिक हो, की राशि के अलावा एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के रूप में देययोग्य कुल राशि से अधिक नही होगी)
  3. शिक्षा उपकर (Education Cess): आयकर तथा अधिभार की राशि ऐसे आयकर तथा अधिभार के 2% प्रतिशत की दर पर आंके गए शिक्षा उपकर द्वारा आगामी वृद्धि की जाएगी।
  4. माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर (Secondary and Higher Education Cess): आयकर तथा अधिभार की राशि ऐसे आयकर तथा अधिभार के 2 % की दर पर आंके गए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा आगामी वृद्धि की जाएगी।
  5. धारा 87A के अंतर्गत छूट : छूट निवासी व्यक्ति के लिए उपलब्ध होती हैं यदि उसकी कुल कर योग्य आय रू. 5,00,000 से अधिक न हो। छूट की राशि अधिकतम 12,500 रू होगी.

Go Back

Comment