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बेटी के जन्म पर सरकार जामणा भरेगी

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अब बेटी का जन्म होने पर पुत्री और माता-पिता का सम्मान करेगा। चिकित्सा और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बैंडबाजे के साथ उस परिवार का जामणा भरेंगे। ये फैसला बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत किया गया है। ये व्यवस्था जून-जुलाई में शुरू किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा बालिका के जन्मोत्सव पर समारोह का आयोजन भी किया जाएगा।आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती की गोद भराई की रस्म अदा की जाती है लेकिन अब चिकित्सा विभाग की मदद से जामणा भरा जाएगा।

पुत्रियों के प्रति नजरिया बदलने के लिए चिकित्सा एवं महिला बाल विकास विभाग की अनूठी पहल 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने की दिशा में ये पहल की गई है। इससे लोगों में बेटियों के प्रति नजरिया बदलेगा। साथ ही लिंगानुपात में सुधार होगा। ग्रामीण क्षेत्रों मेंं भी यह कार्य किया जाएगा। गांवों में जन्म लेने वाली बालिकाओं को चिह्नित करने, बालिका के घर जाने के लिए ढोल-नगाड़े की व्यवस्था करने, बालिका के लिए खिलौने, नारियल, कपड़े, माला, माता के लिए साड़ी आदि की व्यवस्था के लिए अफसरों को निर्देश दिए गए हैं। 
अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर होती थी गोद भराई 
चिकित्साएवं स्वास्थ्य विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म अदा की जाती रही है। पारंपरिक रीति रिवाज मंगलगीतों के बीच गर्भवती महिलाओं को शॉल और मीठा दिया जाता है। इसके अलावा जन्म के छह माह बाद बच्चों को अन्न खिलाने का भी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। जामणा व्यवस्था से भू्रण हत्या की रोकथाम बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लिंगानुपात में भी सुधार होगा।  

अधिकारी गाजे-बाजे के साथ पहुंचेंगे घर 
जिस दंपती के घर में बेटी का जन्म होगा वहां अब चिकित्सा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गाजे-बाजे के साथ जामणा लेकर जाएंगे। संबंधित अधिकारी बालिका उसके माता-पिता को कपड़े देकर स्वागत करेंगे। वहीं बालिका के लिए खिलौने, फल मिठाई भी लेकर जाएंगे। न्याय आपके द्वार अभियान के दिन संबंधित क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पटवारी, महिला पर्यवेक्षक, ग्राम सचिव, सरपंच, वार्ड पंच, कृषि पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, साथिन ग्रामवासी गांव में एक स्थान पर एकत्र होकर गाजे-बाजे के साथ जिस घर में बालिका का जन्म हुआ है वहां पहुंचेंगे। 

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