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बारिश की माप - कैसे होती है

Jul 16, 2016 at 02:50PM

बारिश कितनी हुई, इसकी नाप आमतौर पर अखबारों में पढ़ने को मिल जाती है लेकिन यह बारिश किस तरह मापी जाती है, यह शायद बहुत कम ही लोग जानते होंगे। तहसील मुख्यालय और इससे बड़े सभी शहरों में बारिश की माप की सरकारी व्यवस्था है। तहसील मुख्यालय से निचले स्तर पर साधारणतया बारिश की माप सरकारी स्तर पर नहीं की जाती है, तहसील मुख्यालय की माप ही सरकारी रिकार्ड में इस इलाके की औसत बारिश होती है। बारिश मापने का यंत्र सामान्यतया तहसील कार्यालय पर ही लगा होता है, हालांकि कई स्थानों पर तहसील कार्यालय से इतर भी वर्षामापी यंत्र लगाया जाता है। यह यंत्र ऊंचे और खुले स्थान पर लगाया जाता है जहां आसपास पेड़, ऊंची दीवारें नहीं हों और बारिश का पानी सीधे ही यंत्र में गिरे। वर्षामापी, एक सिलेंडरनुमा यंत्र होता है जिसमें ऊपरी सिरे पर कीप लगा हुआ होता है, कीप में बारिश का सीधा पानी गिरता है जो इसके नीचे लगे एक बोतलनुमा पात्र में जमा होता रहता है। जब बारिश की माप करनी होती है तो बाहरी सिलेंडर को खोलकर बोतल में जमा पानी को कांच के बने एक बीकर में डाला जाता है, इस बीकर पर मिलीमीटर के नंबर अंकित होते हैं और जितने मिमी पानी बीकर में आता है, वही बारिश की माप होती है। बारिश की माप मानसून के दिनों में आमतौर पर दिन में दो बार, सुबह 8 बजे तथा शाम 5 बजे की जाती है लेकिन जरूरी होने पर बीच में भी बारिश मापी जा सकती है। 

Source - Dainik Bhaskar

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